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Rajdhani Raipur informaTion

Rajdhani Raipur informaTion

Raipur being Geographically Located almost at the center of the Chhattisgarh state, was made it's capital. District Raipur Extends from latitude 21° 23″ to longitude 81° 65″.

Area –
 District Raipur was divided into three parts in the year 1998 resulting in the formation of Mahasamund and Dhamtari districts. Similarly, in the year 2011, Raipur was again divided forming two new districts namely Gariaband and Balodabazar-Bhatapara. Raipur district includes Dharsiwa, Arang, Abhanpur and Tilda plains.Raipur district is situated at 244 to 409 meters above sea level.

Neighbouring Districts – 
District Raipur is surrounded by six neighboring districts viz Durg, Bemetara, Balodabazar-Bhatapara, Mahasamund, Raipur and Dhamtari.

Rivers – 
Mahanadi and Kharun are the major rivers of Raipur district. Mahanadi is the most important river of Chhattisgarh, originating from Shrungi mountains in Sihawa Tehsil of Dhamtari district. Kharun is another important river flowing in Raipur and Durg districts which originates in the hills of Petchuva in Durg district.

Climate and Rainfall – 
Raipur district has the maximum temperature of 44.3° C and minimum of 12.5° C The total average rainfall in the district is 1370 mm.

Soil – 
The area includes Kanhar, Dorsa, Matasi, Kachar and Bhatha lands with a PH average of 6.5 to 7.5 which is considered very useful for agriculture.

Rajdhani Raipur information -
जिला रायपुर छत्तीसगढ़ प्रान्त के मध्य में स्थित होने के फलस्वरूप जिला रायपुर को छत्तीसगढ़ की राजधानी बनाया गया। जिला रायपुर अक्षांश 21° 23″ एवं देशांश 81° 65″ के मध्य स्थित है |

क्षेत्रफल – वर्ष 1998 में जिला रायपुर 3 भागों में विभक्त हुआ , जिसके विभक्त होने से जिला महासमुंद एवं धमतरी का निर्माण किया गया | इसी प्रकार वर्ष 2011 में रायपुर को पुनः विभक्त कर 2 नये जिले बलौदाबाजार-भाटापारा एवं गरियाबंद का निर्माण किया गया है | रायपुर जिले के अंतर्गत धरसीवा, आरंग , अभनपुर एवं तिल्दा मैदानी क्षेत्र शामिल है| रायपुर जिला समुद्र तल से 244 से 409 मीटर उचाई पर स्थित है |

पडोसी जिले – जिला रायपुर 6 पडोसी जिले क्रमशः दुर्ग , बेमेतरा , बलौदाबाजार-भाटापारा ,महासमुंद , रायपुर एवं धमतरी से घिरा हुआ है |

जल नदियां – जिला रायपुर में मुख्यत: महानदी एवं खारुन नदी प्रवाहित होती है | महानदी छत्तीसगढ़ की सर्वाधिक महत्वपूर्ण नदी है , जिसका उद्गम धमतरी जिले के नगरी – सिहावा तहसील में स्थित श्रृंगी पर्वत से हुआ है | इसी प्रकार खारुन नदी रायपुर एवं दुर्ग जिले में प्रवाहित होने वाली महत्वपूर्ण नदी है, जिसका उद्गम दुर्ग जिले के पेटेचुवा के पहाड़ी से हुई है |

जलवायु एवं वर्षा – रायपुर जिले का औसत अधिकतम तापमान 44.3°C एवं नयूनतम तापमान 12.5°C है जिले की कुल औसत वर्षा 1370 मिमी. हैं |

मिट्टी – क्षेत्र में कन्हार , डोरसा , मटासी , कछार एवं भाठा भूमि शामिल हैं जिसका ph औसत 6.5 से 7.5 है, जो प्रमुख रूप से कृषि कार्य हेतु बहुत ही उपयोगी है |

रायपुर शहर छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी है और यह मध्य भारत में स्थित है। रायपुर शहर छत्तीसगढ़ (प्राचीन दक्षिण कोसल) के क्षेत्र का मुख्य नगर है। रायपुर शहर का क्षेत्रफल 55.03 वर्ग किमी है और यहाँ कोई उल्लेखनीय प्राचीन इमारत नहीं हैं।


  • उद्योग और व्यापार:-

    इतिहास

    यहाँ की बस्ती की स्थापना 14 वीं शताब्दी में रतनपुर राजवंश के राय ब्रह्मदेव ने की थी। खलारी के कलचुरी नरेश राजा सिंहा ने प्रथम बार यहाँ अपनी राजधानी बनाई। यह भूतपूर्व छत्तीसगढ़ रियासत मंडल का मुख्यालय था और 1867 में इसे नगरपालिका बनाया गया। आजकल यह दक्षिण-पूर्वी रेलवे का एक प्रमुख जंक्शन है। 15 वीं शताब्दी के क़िले में अनेक मन्दिर है, जो महत्त्वपूर्ण नहीं हैं। इन्हें रूढ़िगत शैली में पुरानी सामग्री से बनाया गया है। भवानी का मन्दिर सर्वाधिक प्रसिद्ध है, जिसका पुनर्निर्माण शहर के सबसे प्राचीन मंदिर स्थल पर भग्नावशेष सामग्री से किया गया है। शहर में बूढ़ा तालाब और महाराज जी बांध जैसे कई जलाशय हैं, जो दरअसल बड़ी झीलें हैं। रायपुर में महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय है, जिसमें प्राचीन महत्त्व के अभिलेख मूर्तियाँ सिक्के और प्राकृतिक इतिहास व मानव विज्ञान से संबंधित सामग्री संग्रहीत है।

  • रायपुर व्यापार और वाणिज्य का सक्रिय केंद्र है। यहाँ चावल, दलहन और तिलहन मिलें काफ़ी संख्या में हैं। अन्य उद्योगों में हथकरघे पर सूती वस्त्रों की बुनाई, फर्नीचर निर्माण, हार्डवेयर, ट्रांजिस्टर के कलपुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान, बीड़ी निर्माण, प्लास्टिक की थैलियाँ लकड़ी की चिराई व तख्तें, छापाख़ाने व एल्युमिनियम और पीतल व कांसे की वस्तुओं का निर्माण शामिल हैं। यह खाद्य-प्रसंस्करण (चावल, गेहूँ, कपास और तिलहन) और आरा मिलों का केंद्र है। यह भी उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य का पहला दैनिक समाचार पत्र 'महाकौशल' रायपुर से ही प्रकाशित हुआ था।


  • यातायात और परिवहन
    यह आंध्र प्रदेश राज्य के विजयनगर और विशाखापट्टनम बंदरगाह से रेलमार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। यह पूरे देश से सड़कमार्ग, वायुमार्ग और रेलमार्ग द्वारा अच्छी तहर से जुड़ा हुआ है।


सीजी ०४ का उपयोग रायपुर जिले के वाहनों में किया जाता है , यहाँ के समस्त वाहनों में वाहन का नंबर प्लेट में स्टार्टिंग में सीजी ०४ लिखा रहता है , फिर  वाहनों का नंबर लिखा जाता है जिससे गाड़ियो की आसानी से पहचान कर लिया जाता है। 

  • वायु मार्ग
    भुवनेश्वर, भोपाल, जबलपुर और दिल्ली से रायपुर के लिए नियमित वायु सेवा हैं जिनसे पर्यटक आसानी से रायपुर तक पहुँच सकते हैं।



  • रेल मार्ग
    दक्षिण-पूर्व रेलवे ने नागपुर-कोलकाता रेलवे लाईन पर पर्यटकों की सुविधा के लिए स्टेशन का निर्माण किया है। अत: पर्यटक रेल द्वारा भी आसानी से रायपुर तक पहुँच सकते हैं।



  • सड़क मार्गराष्ट्रीय राजमार्ग 6 और 43 द्वारा पर्यटक आसानी से रायपुर तक पहुँच सकते हैं।


  • शिक्षण संस्थान
    रायपुर अध्ययन का महत्त्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ के कला, विज्ञान, वाणिज्य विधि, कृषि विज्ञान, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, औषधी विज्ञान (आयुर्वेदिक और ऐलोपैथिक) और प्राच्य भाषाओं के कॉलेज यहीं स्थित रविशंकर शुक्ला विश्वविद्यालय (1964) से संबद्ध हैं।
    छत्तीसगढ़ में दूरदर्शन की शुरुआत सर्वप्रथम रायपुर से हुई थी। दूरदर्शन द्वारा चलाये गये शिक्षण कार्यक्रमों से भी यहाँ के जीवन स्तर में सुधार आया है।


    रायपुर में अनेक संगीत अकादमियां एक संग्रहालय, एक क्षयरोग अस्पताल और चावल व रेशम व्यवसाय के प्रायोगिक फ़ार्म भी हैं।



छत्तीसगढ़ राज्य का एकमात्र 'कैंसर चिकित्सा केंद्र' रायपुर में ही स्थापित है, जहाँ कैंसर के रोगों का इलाज किया जाता है।
रायपुर में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग का मुख्यालय भी है।

  • पर्यटन


  1. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, रायपुर
    रायपुर की प्राकृतिक सुन्दरता पर्यटकों को बहुत आकर्षित करती है। उनके खाने-पीने और ठहरने के लिए यहां पर अनेक होटलों और रिसोर्टो का निर्माण किया गया है। अत: छुट्टियां बिताने के लिए रायपुर बेहतरीन पर्यटक स्थल है। रायपुर के पर्यटन स्थलों में नगरघड़ी है। यह हर घंटे के बाद छत्तीसगढ़ी लोक संगीत सुनाती है। चम्पारन, संत वल्लभाचार्य मन्दिर, तुरतुरिया झरना आदि यहाँ के मुख्य पर्यटन स्थल है। छत्तीसगढ़ राज्य के प्रमुख अभयरण्यों में से एक 'सीता नदी राष्ट्रीय अभयारण्य' रायपुर में ही स्थित है, जो यहाँ की प्रगति और आने वाले पर्यटकों के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है।
  2. मन्दिर

    रायपुर में एक मध्ययुगीन दुर्ग भी है। जिसके अन्दर कई प्राचीन मन्दिर हैं। रायपुर का सर्वश्रेष्ठ मन्दिर दूधाधारी महाराज के नाम से प्रसिद्ध है। इसमें बहुत से भाग श्रीपुर या सिरपुर के कलावशेषों से निर्मित किए गए हैं। इनमें मुख्य पत्थर के स्तम्भ हैं, जिन पर हिन्दू देवी-देवताओं की अनेक मूर्तियाँ खुदी हुई हैं। मन्दिर के शिखर के निचले भाग में रामायण की कथा के कुछ सुन्दर दृश्य उत्कीर्ण हैं। जो अधिक प्राचीन नहीं हैं। प्रदक्षिणापथ के गवाक्ष में नृसिंहावतार की मूर्ति तथा अन्य मूर्तियाँ स्थापित हैं। ये सिरपुर से लाई गई थीं। ये उच्चकोटि की मूर्तिकला के उदाहरण हैं। इस मन्दिर तथा संलग्न मठ का निर्माण दूधाधारी महाराज के द्वारा भौंसले राजाओं के समय में किया गया था। इससे पहले छत्तीसगढ़ में तांत्रिक सम्प्रदाय का बहुत ज़ोर था। दूधाधारी महाराज ने प्रान्त की नवीन सांस्कृतिक चेतना के उदबोधन में प्रमुख भाग लिया और तांत्रिक सम्प्रदाय की भ्रष्ट परम्पराओं को वैष्णव मत की सुरुचि सम्पन्न मान्यताओं द्वारा परिष्कृत करने में महत्त्वपूर्ण योग दिया था। रायपुर से राजा महासौदेवराज का सरभपुर नामक ग्राम से प्रचलित किया गया एक ताम्रदानपट्ट प्राप्त हुआ है। जिसके अभिलेख से यह गुप्तकालीन सिद्ध होता है। इसमें सौदेवराज द्वारा पूर्वराष्ट्र में स्थित श्रीसाहिक नामक ग्राम को दो ब्राह्मणों को दान में दिए जाने का उल्लेख है।


  • जनसंख्या2001 की जनगणना के अनुसार रायपुर नगर निगम क्षेत्र की जनसंख्या 6,05,131 है, और रायपुर ज़िले की जनसंख्या 30,09,042 है।

इतिहास

ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से रायपुर जिले में महत्वपूर्ण है यह ज़िला एक बार दक्षिणी कोशल का हिस्सा था और इसे मौर्य साम्राज्य के तहत माना जाता था। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक किलों को लंबे समय तक नियंत्रित करने के लिए रायपुर शहर, हैहाया किंग्स की राजधानी थी। 9 वीं सदी के बाद से रायपुर शहर का अस्तित्व रहा है, शहर की पुरानी साइट और किले के खंडहर शहर के दक्षिणी भाग में देखे जा सकते हैं। सतवाहन किंग्स ने 2 री और 3 री शताब्दी तक इस हिस्से पर शासन किया।

चौथी शताब्दी ईस्वी में राजा समुद्रगुप्त ने इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था और पांचवीं छठी सेंचुरी ईस्वी तक अपने प्रभुत्व की स्थापना की थी जब यह हिस्सा सरभपुरी किंग के शासन के अधीन आया था। पांचवीं शताब्दी में कुछ अवधि के लिए, नाला राजाओं ने इस क्षेत्र का वर्चस्व किया।  बाद में सोमनवानी राजाओं ने इस क्षेत्र पर कब्ज़ा कर लिया और सिरपुर (श्रीपुर-द सिटी ऑफ वेल्थ) के साथ उनकी राजधानी शहर के रूप में शासन किया। महाशिवगुप्त बलराजुण इस वंश के सबसे शक्तिशाली सम्राट थे। उनकी मां, सोमवंश के हर्ष गुप्ता की विधवा रानी, रानी वसता ने लक्ष्मण के प्रसिद्ध ईंट मंदिर का निर्माण किया।

तुमान के कलचुरी राजा ने इस हिस्से को एक लंबे समय के लिए रतनपुर को राजधानी बना दिया। रतनपुर, राजिम और खल्लारी के पुराने शिलालेख कालचिरि राजाओं के शासनकाल का उल्लेख करते हैं। यह माना जाता है कि इस वंश के राजा रामचंद्र ने रायपुर शहर का निर्माण किया और बाद में इसे अपने राज्य की राजधानी बना दिया।

रायपुर के बारे में एक और कहानी है कि राजा रामचंद्र के पुत्र ब्रह्मदेव राय ने रायपुर की स्थापना की थी। उनकी राजधानी खलवतिका (अब खल्लारी) थी। नव निर्मित शहर का नाम ब्रह्मदेव राय के नाम पर ‘रायपुर’ रखा गया था। यह अपने समय के दौरान 1402 ए.डी. में हुआ था। हजराज नायक, हकेश्वर महादेव का मंदिर,

खारुन नदी के किनारे का निर्माण किया गया था। इस राजवंश के शासन की कमी ने राजा अमरसिंह देव की मृत्यु के साथ आया था। अमरसिंघे की मौत के बाद यह क्षेत्र भोसले राजाओं का क्षेत्र बन गया था। रघुजी तृतीय की मृत्यु के साथ, क्षेत्र ब्रिटिश सरकार ने नागपुर के भोंसला से ग्रहण किया था और छत्तीसगढ़ को

1854 में रायपुर में मुख्यालय के साथ अलग सचिव घोषित किया गया था। आजादी के बाद रायपुर जिले को केन्द्रीय प्रांतों और बरार में शामिल किया गया था।

  • निवेश:

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में, 2007 से पता चलता है कि छत्तीसगढ़ में 2006-07 में, 13 लाख मूल्य के 580 परियोजनाओं को स्वीकृत किया गया था। यह भारत में कुल निवेश के 0.8% तक योगदान देता है राज्य ने अक्टूबर, 4.87 तक $ 2007 अरब के मूल्य के निवेश प्रस्तावों को आकर्षित किया है। राज्य में सबसे बड़े निवेशकों में से एक वेदांत समूह है। अपने मौजूदा निवेश के साथ ही, छत्तीसगढ़ में एक बड़े एल्यूमीनियम संयंत्र की स्थापना के लिए वेदांता ने एक और यूएसआईडी एक्सएक्स एक्स बिलियन निवेश करने की योजना बनाई है। समूह ने भी पांच निजी सीमेंट और इस्पात कंपनियों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनके मूल्य USD 2.44 अरब हैं। छत्तीसगढ़ के बिजली बोर्ड ने कोरबा में एक्सएंडएक्स मेगावाट बिजली संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रही है, जो यूएसएएनएनटी एक्स बिलियन अमरीकी डॉलर का है।
स्रोत: परियोजनाएं आज डेटाबेस, जून 2004

  • जलवायु :

रायपुर में एक उष्णकटिबंधीय गीला और शुष्क जलवायु है; मार्च से जून तक, पूरे वर्ष में तापमान सामान्य रहता है, जो बेहद गर्म हो सकता है। शहर में लगभग 12 लाख मिलीमीटर (1,300 in) बारिश होती है, जो ज्यादातर जून के शुरूआती अक्टूबर से लेकर अक्टूबर की शुरुआत तक मानसून के मौसम में होती है। नवंबर से जनवरी तक विंटर्स पिछले और हल्के होते हैं, हालांकि झुकाव 51 डिग्री सेल्सियस (5 ° F) तक गिर सकता है।
इसकी एक मिश्रित जलवायु है जो अधिक गर्म पक्ष की ओर है; ग्रीष्मकाल अत्यंत गर्म होते हैं और कभी-कभी पारा 47 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है
भोजन :
छत्तीसगढ़ में कई अजीब व्यंजन हैं, जिन्हें संस्कृति का हिस्सा माना जाता है। छत्तीसगढ़ में भोजन खास है और इसकी स्वाद के लिए जाना जाता है। स्थानीय व्यंजनों में बहुत सारे स्वाद, मसालें और सुगंध का उपयोग किया जाता है। चटनी और अचार छत्तीसगढ़ के व्यंजनों का एक आवश्यक घटक है। यहां के लोगों को विशेष रूप से नमकीन और मिठाई के शौकीन हैं स्थानीय लोगों में कुस्ली, काजू बर्फी, जलेबी, लवंग लता, खुरमा, सबूत की खादी, शिकनजी और मूंग दाल का हलवा पसंद हैं। तखुर बार्फी जो आसानी से उपलब्ध है और यहां प्रचुर मात्रा में उगाया जाता है वह इस क्षेत्र का सबसे पसंदीदा पकवान है।
पर्यटन स्थल :-
Nagar Ghadi : यह XONGX में रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित एक गायन क्लॉक है। यह घंटे भर घंटी झंकार से हर घंटे छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के मेलोडियस ट्यून्स गाती है। इसके दो पुरस्कार "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" और "इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" मिल चुके हैं। यह घड़ी अपने लोक संगीत की वजह से अनूठी प्रकार की घड़ी में से एक है।
गांधी उद्यान: रायपुर के सबसे पुराने पार्कों में से एक गांधी उद्यान मुख्यमंत्री के आवास के बगल में स्थित है।
बुडा झील: शाब्दिक अर्थ में वृद्ध (बुद्ध) का अर्थ है, बुद्ध झील शहर की सबसे बड़ी झील है। इसकी सुंदरता एक द्वीप से बढ़ी है, जो झील के मध्य में स्थित हरे पेड़ों और उद्यानों से सजी है। यह स्वामी विवेकानंद का एक सुंदर मूर्ति है जो झील के केंद्र में स्थित है।
Dudhadari Temple : बुद्ध तालाब के पास स्थित, 500 वर्षीय दुधादिरी मंदिर है, जिसमें विस्तृत नक्काशियों हैं। मंदिर हिंदू भगवान राम को समर्पित है

बंजारी माता मंदिर: यह एक प्रसिद्ध मंदिर है जिसे श्री हरीश जोशी द्वारा स्थापित किया गया था। लोककथाओं में यह कहा गया है कि श्री जोशी को ऐसी जगह मिली जहां एक पत्थर बंजारी माता की मूर्ति की तरह दिखता था। मूर्ति की खोज करने पर, उन्होंने इसे पूजा करना शुरू कर दिया और इस तरह सार्वजनिक ध्यान आकर्षित किया। तब से यह जगह एक मंदिर में परिवर्तित हो गई है।

शद्दी दरबार: संत श्री शद्रारामजी साहब के नाम पर, हिंदुओं के लिए एक लोकप्रिय तीर्थ स्थान है। यह रायपुर रेलवे स्टेशन से लगभग दस किलोमीटर और हवाई अड्डे से केवल 4 किलोमीटर, धमतरी रोड पर स्थित है। शिनदानी दरबार, जो एक्सएनएक्सएक्स एकड़ (एक्सएक्सएक्सएक्सएक्सएक्सएक्सएक्सएक्स) की ज़मीन पर फैला है, में एक बड़ा हॉल है जहां धुनी साहब रखा गया है। देवताओं और अवतारों (अवतार) की खूबसूरती से उत्कीर्ण छवियों को दीवार के दोनों तरफ देखा जा सकता है दूख भंजन धूमनी हर दिन किया जाता है। अन्य मुख्य आकर्षण धार्मिक मूर्तियों और मूर्तियों के साथ संगीत फव्वारे हैं।

Mahant Ghasi Das Memorial Museum : इस संग्रहालय में प्राचीन शिलालेख, चित्र, सिक्के, ऐतिहासिक महत्व की मूर्तियों का एक बड़ा संग्रह प्रदर्शित किया गया है।

=&SK;  Shaheed Smarak Complex : वास्तुकार प्रसन्ना कोठारी द्वारा एक अनोखी अवधारणात्मक वास्तुशिल्प अचंभे - स्वाधीनता सेनानियों का स्मारक, शहर के केंद्र में स्थित है। इसमें एक विशाल सभागार, पुस्तकालय, संग्रहालय और एक आर्ट गैलरी शामिल है।
नंदनवन गार्डन: रायपुर वन विभाग के वन्यजीव विभाजन द्वारा विकसित, शहर की पश्चिमी सीमा में खरून नदी के तट पर, रायपुर से लगभग 15 किमी स्थित है। यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है

  • कृषि:-
    राज्‍य में 80 प्रतिशत आबादी कृषि और संबंधित गतिविधियों में लगी है। 137.9 लाख हेक्‍टेयर भौगोलिक क्षेत्र में कुल कृषि क्षेत्र भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 35 प्रतिशत है। खेती का प्रमुख मौसम खरीफ है, जिसमें लगभग 45.89 लाख हेक्‍टेयर में खेती होती है। चावल यहां की मुख्‍य फसल है। अन्‍य सर्वाधिक भंडार है। लगभग 540 हज़ार हेक्‍टेयर में बागवानी फसलें उगाई जाती हैं राज्‍य द्वारा शुरू किया अनूप कार्यक्रम किसानों को धान की कमी उपजाउ किस्‍म के बदले व्‍यावसायिक रूप से अधिक उपजाउ किस्‍मों तथा अन्‍य फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है।


  • सिंचाई और बिजली:-
    जब यह राज्‍य अस्तित्‍व में आया, तब इसकी कुल सिंचाई क्षमता 13.28 लाख हेक्‍टेयर थी जो बढ़कर 18.09 लाख हेक्‍टेयर हो गई है। पूरी हो चुकी मुख्‍य परियोजनाएं है: तांदुला, कोडर और पेयरी।

  • खनिज संसाधन:-छत्‍तीसगढ़ में आग्‍नेय, कायांतरित और तलछटी क्षेत्रों में अनेक प्रकार के खनिज पाए जाते हैं। कोयला, कच्‍चा लोहा, चूना पत्‍थर, बॉक्‍साइट, डोलोमाइट तथा टिन के विशाल भंडार राज्‍य के विभिन्‍न हिस्‍सों में फैले हुए हैं। रायपुर जिले में हाल ही में पहचाने गए डाइमंडीफैरस किंबरलाइट्स में से काफी मात्रा में हीरा प्राप्‍त किया जा सकता है। इसके अलावा सोना, आधार धातुओं, बिल्‍लौरी पत्‍थर, चिकना पत्‍थर, सेटाइट, फ्लोराइट, कोरंडम, ग्रेफाइट, लेपिडोलाइट, उचित आकार की एम्‍लीगोनाइट के विशाल भंडार मिलने की संभावना है। राज्‍य में देश के 20 प्र‍तिशत इस्‍पात और सीमेंट का उत्‍पादन किया जाता है। कच्‍चे टिन का उत्‍पादन करने वाला यह देश का एकमात्र राज्‍य है। यहां खनिज संसाधनों से उत्‍खनन, खनिज आधारित उद्योग लगाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की अपार क्षमता है। छत्‍तीसगढ़ में विश्‍व का सबसे अधिक किंबरलाइट भंडार क्षेत्र है। आठ ब्‍लॉकों में हीरे की संभावना का पता लगाने के लिए पहचान की गई है। हीरे के अलावा सोने की संभावना के लिए चार तथा आधार धातुओं के लिए पांच ब्‍लॉक चिन्हित किए गए हैं।

  • उद्योग:-छत्‍तीसगढ़ में वन, खनिज और भूजल प्राकृतिक संसाधनों का असीम भंडार है। पिछले कुछ वर्षो में राज्‍य में महत्‍वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं और यह उद्योगों के मामले में बहुत फल-फूल रहा है। छत्‍तीसगढ़ में देश का लगभग 20 प्रतिशत इस्‍पात और 15 प्रतिशत सीमेंट तैयार होता है। भिलाई इस्‍पात संयंत्र, राष्‍ट्रीय खनिज विकास निगम, साउथ-ईस्‍टर्न कोल फील्‍ड्स लिमिटेड, एन.टी.पी.सी. जैसे भारत सरकार के उपक्रम और ए.सी.सी. गुजरात अंबुजा, ग्रासिम, एल एंड टी, सी सी आई और फ्रांस के लाफार्ज जैसे बड़े सीमेंट प्‍लांट तथा 53 इस्‍पात परियोजनाएं क्रियान्‍वयन के विभिन्‍न चरणों में हैं। राज्‍य में लगभग 133 इस्‍पात ढालने के कारखाने, अनेक लघु इस्‍पात संयेत्र, 11 फेरो-एलॉय कारखाने, इंजीनियरिंग और निर्माण सामग्री और वनोत्‍पाद पर आधारित कारखाने हैं।

परिवहन:-सड़के: राज्‍य में सड़कों की कुल लंबाई 33448.80 कि.मी. है। राष्‍ट्रीय राजमार्गो की लंबाई 2,226 कि.मी., प्रांतीय राजमार्गो की लंबाई 5240 कि.मी., जिला की लंबाई 10,539.80 और ग्रामीण सड़कों की लंबाई 15,443 कि.मी. है। बेहतर संपर्क के लिए उत्‍तर-दक्षिण को जोड़ने वाले दो तथा पूर्व-पश्चिमी को जोड़ने वाले चार सड़क गलियारे बनाए जा रहे हैं जिनकी लंबाई 3,106.75 कि.मी. है।


रेल: रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांद गांव, रायगढ़ और कोरबा यहां के प्रमुख रेल स्‍टेशन है।


  • पर्यटन स्‍थल :-भारत के ह्दय में स्थित छत्‍तीसगढ़ में समृद्ध सांस्‍कृतिक और आकर्षक प्राकृतिक विविधता है। राज्‍य में प्राचीन स्‍मारक, दुर्लभ वन्‍यजीव, नक्‍काशीदार मंदिर, बौद्धस्‍थल, महल, जल-प्रपात, पर्वतीय पठार, रॉक पेंटिंग और गुफाएं हैं। बस्‍तर अपनी अनोखी सांस्‍कृतिक और भौगोलिक पहचान के साथ पर्यटकों को नई ताजगी प्रदान करता है। चित्रकोट के जल-प्रपात-जहां इंद्रावती नदी का पानी 96 फुट की ऊंचाई से गिरने से बने तीरथगढ़ प्रपात नयनाभिराम दृश्‍य उपस्थित करते हैं। अन्‍य प्रमुख स्‍थल है: केशकल घाटी, कांगेरघाटी राष्‍ट्रीय पार्क, कैलाश गुफाएं और कुटुंबसर गुफाएं जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जानी जाती हैं।
  • बिलासपुर में रतनपुर का महामाया मंदिर, डूंगरगढ़ में बंबलेश्‍वरी देवी मंदिर, दंतेवाड़ा में दंतेश्‍वरी देवी मंदिर और छठी से दसवीं शताब्‍दी में बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र रहा सिरपुर भी महत्‍वपूर्ण पर्यटन स्‍थल हैं। महाप्रभु वल्‍लभाचार्य का जन्‍मस्‍थल चंपारण, खूंटाघाट जल प्रपात, मल्‍हार में डिंडेश्‍वरी देवी मंदिर, अचानकमार अभयारण्‍य, रायपुर के पास उदंति अभयारण्‍य, कोरबा जिले प्रपात पर्यटकों के मनपसंद स्‍थल हैं।
  • खारोड जांजगीर-चंपा का शबरी, मंदिर, शिवरीनारायण का नरनारायण मंदिर, रंजिम का राजीव लोचन और कुलेश्‍वर मंदिर, सिरपुर का लक्ष्‍मण मंदिर और जांजगीर का विष्‍णु महत्‍वपूर्ण धार्मिक स्‍थलों में हैं। पर्यटन क्षेत्र के स्‍थायी विकास के लिए राज्‍य ने केंद्रीय एजेंसी के रूप राज्‍य पर्यटन संवर्द्धन बोर्ड का गठन किया है।

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